19 नवंबर को संसद के समक्ष होगा प्रदर्शन

★सरकारी कर्मी का दर्जा,18000 मानदेय, समान काम समान वेतन सहित 22 सूत्री मांगों पर 5 अक्टूबर से जारी था 5 दिवसीय हड़ताल व दो दिवसीय महाधरना।
★ आधुनिक गुलामी की प्रतीक नियोजन नीति को समाप्ति के लिये मोदी-नीतीश को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान।
★प्रधानमंत्री के नाम सीएम नीतीश को दिया ज्ञापन।

बिहार राज़्य विद्यालय रसोइया संघ(ऐक्टू) के आह्वान पर रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, समान काम के लिए समान वेतन देने, मानदेय 18000 करने, मध्यान्ह भोजन योजना को एनजीओ के हवाले करने पर रोक,अशोक चौधरी कमिटी की रिपोर्ट की सिफारिशों का लाभ रसोइयों को देने, पार्ट टाइम वर्कर कहने पर रोक, मानदेय का नियमित भुगतान व बारह महीने का मानदेय भुगतान समेत 23 सूत्री मांगों के लिये बिहार में पांच अक्टूबर से रसोइयों का 5 दिवसीय हड़ताल व पटना में दो दिवसीय महाधरना 19 नवंबर को संसद के समक्ष प्रदर्शन की घोषणा के साथ सम्पन्न हो गया।
बिहार राज़्य विद्यालय रसोइया संघ(ऐक्टू) अध्यक्ष सरोज चौबे की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर को दूसरे दिन शुरू हुए महाधरना में करीब दर्जन भर से अधिक जिलों से करीब दो हज़ार रसोइयों ने भाग लिया। आज हुए सभा को महासंघ गोप गुट के सम्मानित प्रदेश अध्यक्ष रामबली प्रसाद, ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार,ऐक्टू नेत्री व आशा संघ अध्यक्ष शशि यादव, ऐक्टू नेता जितेंद्र प्रसाद, कमलेश कुमार सहित विभिन्न जिलों की रसोइया व ऐपवा नेता दमयंती सिन्हा, लीला वर्मा, सोहिला गुप्ता, पूनम कुमारी, सुधा रानी सिंह, मीना देवी, चिंता देवी, मधुरानी सिन्हा, मीणा देवी, आशा देवी आदि नेताओ ने सभा को सम्बोधित किया।

सभा को सम्बोधित करते हए उक्त नेताओं ने ठेका-मानदेय-प्रोत्साहन राशि आधारित नियोजन नीति को आधुनिक गुलामी वाला नियोजन नीति बताया। नेताओं ने रसोइयों सहित अन्य स्कीम वर्करों को आधुनिक गुलाम बताते हुय गुलामी वाली इस नीति के समाप्ति के लिए मोदी –  नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान रसोइयों से किया। नेताओं ने मोदी – नीतीश सरकार पर स्कीम वर्करों के साथ धोखाधड़ी करने, इनकी हकमारी करने और किसी तरह का कोई कानूनी व सामाजिक सुरक्षा का अधिकार नही देने का गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ देश का लाखों करोड़ रुपया की लूट करने और लूट कर विदेश भागने की छूट मोदी सरकार दिये हुए है तो दूसरी तरफ एक एक पैसा और अधिकार के लिये रसोइयों को मोहताज बनाया जा रहा है और इन्हें इनके कार्यस्थलों पर चोर, दाई कह कर अपमानित किया जा रहा है, साथ ही सबसे कम मेहनताना में खाना बनाने के अलावे बर्तन साफ करने, स्कूल में झाड़ू लगवाने का अतिरिक्त काम लिया जा रहा है जिसका दाम तो नही ही दिया जा रहा है, बल्कि इस परिघटना ने नीतीश-मोदी के महिला सशक्तिकरण के दावों हवा निकाल दी है।



विद्यालय रसोइयों के 23 सूत्री मांगों से सम्बंधित प्रधानमंत्री मोदी के नाम का ज्ञापन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिवालय को सुपुर्द किया गया।

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