स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने देश भर में दिया धरना! कर्ज माफी, और रोज़गार की मांग उठाई !!

29 मई को ऐपवा के आह्वान पर देश भर में स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) की महिलाओं ने गांव-मोहल्लों में धरना दिया, और महामारी और लॉक डाउन के चलते आपदा की स्थिति में कर्ज माफ़ी और अन्य मांगों को उठाया. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, असम, कार्बी आंग्लांग, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, ओडिशा, उत्तराखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटका, सहित अन्य राज्यों के सैंकड़ों गांवों और मोहल्लों में ऐसे धरने आयोजित हुए.

धरने की मुख्य मांगें थीं -
1.स्वयं सहायता समूह में शामिल महिलाओं का कर्ज माफ करो!
2.माइक्रो फायनांस कम्पनियों द्वारा दिए गए कर्जों का भुगतान सरकार को करना होगा!
3. हर समूह को उसकी क्षमता के अनुसार या कलस्टर बनाकर रोजगार का साधन उपलब्ध कराओ!
4. एस०एच०जी०(स्वयं सहायता समूह - सेल्फ हेल्प ग्रुप) के उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करो!
5. स्वयं सहायता समूह को ब्याज रहित ऋण दो!
6. जीविका कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 15 हजार रुपए मासिक मानदेय दो!

यह धरना गांव - मुहल्ले में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए आयोजित किया गया.

धरने का नेतृत्व कर रही ऐपवा राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि केन्द्र सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा में स्वयं सहायता समूह के लिए कुछ नहीं है। सरकार की घोषणा में बस इतना है कि एक साल तक उन्हें लोन की किस्त जमा करने से छूट मिलेगी। कर्ज माफ नहीं होगा, बल्कि उन्हें कर्ज जमा करने के समय में छूट दी गई है। हम सभी जानते हैं कि अन्य तमाम श्रमिक वर्ग की तरह ही लॉकडाउन के कारण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह बिगड़ गई है। एक साल के बाद भी लोन चुकता करना उनके लिए संभव नहीं होगा। दूसरी तरफ स्वयं सहायता समूह चलाने वाली प्राइवेट कम्पनियां अभी भी लोन का किस्त जबरन वसूल रही हैं .प्राइवेट कम्पनियों का ब्याज दर ज्यादा और मनमाना है और इस दौर में महिलाओं के लिए यह कर्ज चुकाना संभव नहीं है. सरकार बड़े पूंजीपतियों के कर्जे लगातार माफ करती जा रही है जबकि जरूरत है कि उनसे कर्ज वसूल किया जाए और गरीब महिलाओं को राहत दी जाए। दूसरे, इन समूहों को सरकार रोजगार का साधन उपलब्ध करवाए और इनके बनाए समान की खरीद करे .आर्थिक उपार्जन की व्यवस्था नहीं होने के कारण ये महिलाएं एक बार जो कर्ज लेती हैं तो फिर उस जाल में फंसती चली जाती हैं.

ऐपवा महासचिव मीना तिवारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष ई.रति राव ने कहा कि महिलाओं को मिलने वाले कर्ज पर सरकार को ब्याज वसूलना बंद करना चाहिए और आगे से शून्य प्रतिशत ब्याज पर उन्हें कर्ज दिया जाए. ऐपवा ने कहा कि इस महामारी के दौर में जब कोरोना योद्धाओं को मास्क तक नहीं मिल रहे. तब अगर सरकार ने इन समूहों को मास्क बनाने का काम दिया होता तो सबको मासक मिलता और इन महिलाओं की कुछ आमदनी होती. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. उदाहरण के लिए बिहार सरकार ने हरेक परिवार को 4 मास्क देने का फैसला किया है। इसके निर्माण का काम स्वयं सहायता समूह को देने की घोषणा की गई थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि कुछ थोड़े से समूहों को यह काम दिया गया और उसमें से ज्यादातर समूहों से मास्क खरीदा नहीं जा रहा है। अगर इस फैसले को गंभीरता से लागू किया जाता तो समूह को एक बड़ी आर्थिक सहायता हो सकती थी। इसे लागू करने की बजाय सिर्फ रोजगार की बड़ी - बड़ी बातें की जा रही हैं।
शारीरिक दूरी का पालन करते हुए SHGs की महिलाओं ने धरना दिया. जरूरत है कि हर हाल में सरकार बिना देर के उनकी मांगों को स्वीकार करें. विभिन्न राज्यों में हजारों महिलाएं धरने में शामिल हुईं. धरने का नेतृत्व मीना तिवारी, इ रति राव, कविता कृष्णन, सुधा चौधरी, सरोज चौबे , शशि यादव , गीता मंडल, आर नागमणि , प्रतिमा इंग्हपि ,कृष्णा अधिकारी , कुसुम वर्मा , जसबीर नथ ,इंद्राणी दत्ता , चैताली सेन , मीना सिंह ,आरती राय , गीता पांडेय , अनीता सिन्हा ,सोहिला गुप्ता ,इंदू सिंह ,सावित्री देवी , मृणाली देवी ,परी बरुआ , जयंती चौधरी ,शोभा देवी ,नीता बेदिया ,जूही आलम ,फरहत बानो समेत स्थानीय ऐपवा नेताओं ने किया.
( ऐपवा केंद्रीय कार्यालय द्वारा जारी )

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