महिला हिंसा और उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के सवालों पर हलद्वानी में जोरदार प्रदर्शन

"बढ़ती महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने व महिला हिंसा की बढ़ती घटनाओं को मिल रहे राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ" अम्बेडकर पार्क, मंगल पड़ाव,हल्द्वानी में "अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा)" द्वारा एक संक्षिप्त सभा का आयोजन किया गया और तत्पश्चात वहां से एस डी एम कार्यालय तक जुलूस निकालकर भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदय को महिलाओं के ऊपर बढ़ रहे यौन हिंसा के मामलों पर रोक लगाने समेत महिलाओं की अन्य समस्याओं पर ज्ञापन प्रेषित किया गया।

अम्बेडकर पार्क में हुई सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के उत्तराखंड राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि, "आज देश के सामने बहुत ही विकट स्थिति है.लव जेहाद और गोरक्षा के नाम पर उत्पीड़न और हिंसा से बढ़ते हुए अब दिल्ली में संसद मार्ग पर संविधान जलाया जा रहा है और बिहार के बिहिया में पुलिस की मौजूदगी में औरत को नग्न कर सड़क पर घुमाया जा रहा है. यही नहीं, आज सत्ता का प्रश्रय पाकर मॉब लिंचिंग गिरोह देश में हर जगह हिंसा और आतंक का माहौल बना रहे हैं और इन गिरोहों की करतूतों के पक्ष में सरकार के बड़े बड़े मंत्री तर्क दे रहे हैंं. सबके लिए बराबरी और भाईचारे की बात या अपने मौलिक अधिकारों की मांग को भी आज राष्ट्रद्रोह बताकर हिंसा की जा रही है और केंद्र की सरकार इस हिंसा को हवा दे रही है ताकि लोग आपस में बंट कर लड़ते रहें . बेरोजगारी, गरीबी जैसी समस्याओं के लिए दूसरे समुदायों खासकर अल्पसंख्यक समुदाय को दोषी ठहराते रहें ,सरकार के जुमलों पर विश्वास करें और सरकार गरीबों और महिलाओं का हक मारकर अपने चहेते पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाती रहे."
उन्होंने कहा कि, "महिलाओं के संदर्भ में अगर बात करें तो आज सरकार बेटी पढ़ाओ का उपदेश दे रही है और करोड़ों रुपए विज्ञापन पर खर्च कर रही है. बेटियां तो तब पढ़ पायेंगी न जब उनकी पहुंच के दायरे में स्कूल और कॉलेज होंगे लेकिन सरकार गरीब बच्चों की पढ़ाई का पैसा मारकर अम्बानी के अजन्मे विश्वविद्यालय को अरबों रुपए दे रही है. इसी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाई गई आयुष्मान योजना झुनझुना से अधिक कुछ नहीं है."
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की संयोजक विमला रौथाण ने कहा कि, "देश भर में बढ़ती महिला हिंसा से चौतरफा कोहराम मचा हुआ है। बहुत ही शर्म व खेद का विषय है कि देश भर में सरकारी संरक्षण में चलने वाले बालिका व महिला आश्रृय गृहों को राजनेता व नौकरशाह के नापाक गठजोड़ ने बलात्कार व अपनी अय्याशी का अड्डा बनाया हुआ है।बिहार के मुजफ़्फरपुर से लेकर उ०प्र० के देवरिया तक कई स्थानो से वीभत्स घटनाएं जग जाहिर हैं।|पिछले दिनो राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ संस्थान,राजपुर रोड,देहरादून की बच्चियों ने संस्थान के शिक्षकों पर आरोप लगाया कि वे उन्हें गलत तरीके से छूते हैं।इसकी अनदेखी कर जांच को नकारा गया है।"
महिला नेता रूबी भारद्वाज ने कहा कि," गत दिनो कठुआ,उन्नाव तथा उत्तरारवंड के उत्तरकाशी में देखा गया कि बलात्कार के बाद अफवाह फैलाकर सांप्रदायिक उन्माद फैलाया गया।कठुआ अौर उन्नाव में तो प्रदेश सरकारों की उन्मादियों को बचाने के लिए की गई आपराधिक संलग्नता से सभी विज्ञ हैं।"
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा कि,"देश में बढ़ती महिला हिंसा के बाद आज पूरे विश्व में भारत महिलाओ के लिए सबसे असुरक्षित देश में शुमार हो गया है।यह निश्चित ही राष्ट्रीय शर्म का विषय है जिससे उबरे बिना हम सभ्य राष्ट्र नहीं बन सकते हैं।"

रुद्रपुर महाविद्यालय की पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष कविता वर्मा ने कहा कि, "पित्र सत्तात्मक व सामंती जकड़न की गिरफ्त में जकड़े समाज के साथ साथ सरकारों के संरक्षण से बढ़ते नशे व अश्लील संस्कृति के कुचक्र ने महिला हिंसा के लिए उत्प्रेरक का काम किया है , जिस पर अबिलंब रोक लगनी चाहिए।"
इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदय से ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि-
1- देश के सभी बाल व महिला आश्रय गृहों की सुप्रीमकोर्ट/हाईकोर्ट की देखरेख में जांच करवाई जाय।
2-महिला हिंसा के मामले में शीघ्रता शीघ्र फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन आनिवार्य किया जाय।
3-सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशाखा समिति के अंर्तगत हर विभाग में सैक्सुअल हैरेसमेंट कमिटि का गठन कर उसे सार्वजनिक किया जाय।
4- राज्य तथा जिलो में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने वाली समिति तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था को मजबूत व अधिकार संपन्न बना उसे सार्वजनिक किया जाय।
5-अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर उन्हे दंडित किया जाय।
6-सभी विद्यालयों में छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण अनिवार्य हो।
7- हर तरह के नशे पर रोक लगे।
8- सुधा भारद्वाज सहित सभी पांचों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाय।

सभा और जुलूस प्रदर्शन में मुख्य रूप से विमला रौथाण,रूबी भारद्वाज, रीता कश्यप,कविता वर्मा, बसन्ती बिष्ट, शशि गड़िया, ममता पानू, कुलविंदर कौर,कमलेश कौर, शोभना, हीरा जंगपांगी,जानकी देवी बिष्ट,आशा बोरा,पार्वती देवी, चम्पा,मीना मेहता, माहेश्वरी देवी,आशा साही,मोहिनी देवी, राधा,दीपा देवी, पूजा जोशी, गायित्री जोशी,खिमली देवी, मेहरून खातून,निर्मला शाही, नीमा कोरंगा, सरिता जंगी,मुन्नी देवी, भगवती देवी, गीता बोरा, पूजा,काजल जग्गी,कविता आर्य, रीता घुरदौड़ा, रेखा नेगी,ज्योति, शान्ति शाह, गोमती शाह,जीवन्ति देवी,नीमा पाण्डे, हेमा,अन्नू कौर साथ ही समर्थन में बहादुर सिंह जंगी ,आनंद सिंह नेगी,सरताज आलम,चंद्रशेखर भट्ट, प्रकाश फुलोरिया, ललित मटियाली,राजेन्द्र शाह,पुष्कर दुबड़िया, गोपाल सिंह बोरा, कमल जोशी, देवेन्द्र रौतेला, कुंवर सिंह चौहान,हरीश राम, विनोद कुमार, तेजप्रताप, एन डी जोशी आदि समेत बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं.

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